वाहवाह रे ! दुनियादारी है । सब भूल गये नरनारी है

(तर्ज : जोगन खोजन निकली है... )
वाहवाह रे ! दुनियादारी है । सब भूल गये नरनारी है ।।टेक।।
पत्थरको तो घी शक्करसे, खूब मले कर जोरी है ।
भूखेको नहि चना चबाने, ऐसो ग्यान अनारी है ।।१।।
जीते-जी कोडी नहि देवे, मरके धन लुटवायेंगे ।
जीते-जी कर सत्‌की निंदा, मरते जशको गायेंगे ।।२।।
बखत पड़ी तब कोउ न दौरे, नहि तब प्रेम बतायेंगे ।
सुखमें ईश्वर   कभू न बोले, दुखमें नाम जपायेंगे ।।३।।
तुकड्यादास कहे मुँहपर तो हाँजी हाँ कह जायेंगे ।
पीछे जाकर घरमें घुसकर, सिरपर छुरी चलायेंगे ।।४।।