रंग लागा श्याम ! तेरा रे, नैननमें
(तर्ज : गिरिधारी घर आयो रे...)
रंग लागा श्याम ! तेरा रे, नैननमें ।
दिल जागा काम भागा रे, प्रेमनमें ।।टेक।।
खबर नहीं सुधी तन - मन - जनकी ।
मनभर वहही समाया रे, नैननमें ।।१।।
जिधर उधर मेरा श्याम सुहावना ।
बन बन रूप निहारा रे, नैननमें ।।२।।
काम रहे नहीं श्यामकी मोहनीसे ।
घट घट श्याम हमारा रे, नैननमें ।।३।।
तुकड्याकी नैन सारी, मुरली मुरली वारी ।
नटवर छायो पियारा रे, नैंननमें ।।४।।