यौंही तेरी, बिरथा है सारी जवानी !

(तर्ज : भैया मोरे, राखीके बन्धन को...)

यौंही तेरी, बिरथा  है   सारी  जवानी ! 
क्योंकि तूने, उसकी कदर नहिं जानी ! !
सुनले ऐ प्यारे ! कहानी, कहानी ! ।। यौंही 0।।टेक।।
किसी की जवानी लगी सेवा में ।
याद रही  उनकी  दुनिया   में ।।
उनकि मूर्तियाँ है,  मंदर  में ।
किसने रखि है, दिल-अंदर में ।।
मिटती न उनकी निशानी,निशानी ! ।।यौंही 0।।१।।
किसीने खोयी है विषयों में ।
किसीने दारू भंग जुवे  में ।।
किसीने चोरी-घुंसखोरी में ।
व्यभिचारों में पर-नारी  में ।।
धूलिमें मिली  है  निशानी, निशानी ! योंही 0।।२।।
किसीके जवानीने आजादी पायी ।
सारि गुलामी में  क्रांति  मचायी ।।
तोपे और बन्दुक छातीपे  खायी ।
तब ही तो उन्मत्त सत्ता घबड़ाई ।।
खोया नहिं अपना पानी,पानी !।। यौंही 0।।३॥
तीनों कहानी तुझको सुनाया ।
तूने अपना मत क्याss बनाया ? ।।
सोच समझकर कह मोरे भैय्या !
तुकड्या कहे तेरी तुझमें है माया ! ! 
करना न बूरी तुफानी,तुफानी!।। यौही0।।४।।