चल-चल भाई! करे सफाई, कूडा-कचंरा साफ करें।

(तर्ज: चला-चला रे आपण...)

चल-चल भाई! करे सफाई, कूडा-कचंरा साफ करें।
बहूत दिनोंका रुका हुआ है, मिलकर सुंदर आज करें ।। टेक ।।
सडी हुई यह फल और सब्जी ;. कौन दिया है डाल यहाँ ।
मल-मुत्रोंको बाहर छोडा, कौन कियाँ बेहाल यहाँ ??
समझ नहीं आयी है उनको, अपने घरका काज करें!
चल-चल भाई! करे सफाई  ।।१॥
पत्थर -पानी पडा है बाहर, चलते ठोकर लगती है।
घर देखे तो मेला-गंदा, मंगलता सब भगती है।।
जिधर उधर सामान पडा है, जैसे पागल राज करे
चल-चल भाई! करे सफाई ।।२।।
घर नटियोंके चित्र लगे है, साधु संतका नाम नहीं।
नहीं देवता उनके घरमें, जानो उनका काम नहीं।
सत्य बचन, सद्ग्रंथ नहीं है, नहिं फुलवारी साज करें।
चल-चल भाई! करे सफाई0 ।।३।।
आठ बजे सोकरके उठते, पहिले पीते चाय-बीडी।
बादमें झाड़े जाते, आकर मूँह धोते हैं अडी-नडी।
तुकड्यादास कहे, उनके घर,आज चलो अंदाज करें।
चल-चल भाई! करे सफाई 0 ।।४ ।।