चरणों का आधार, मेरा है सहारा
(तर्ज : ये बरखा बहार... )
चरणों का आधार, मेरा है सहारा ।
मुझे भूल जावो ना कहीं ।।टेक।।
अभी तो आदमी की, देह मैंने पायी है ।
कभी तो प्रेम तेरा, ना मिला कहाँ ही है ।
अब हो दीदार, मेरे तारनहार-
मुझे भूल जावो ना कहीं ।।१।।
सहारा है जिनको, अपने प्रभू का दिल में ।
कहीं ना रोक उसे, चाहे चले जा पल में ।
कर दो बेडापार, चाहे हो मंजधार-
मुझे भूल जावो ना कहीं ।।२॥
नगारा बज तो गया, द्वारपे खड़ा तेरे ।
कहाँ भी रोक नहीं, प्राण चले जा मेरे ।
तुकड्या का निर्धार, होगाही उध्दार-
मुझे भूला जावो ना कहीं ।।३।।