सत्के पुजारी है हम
(तर्ज : आज मेरि लाज प्रभू ! .. . )
सत्के पुजारी है हम, सत् धर्म मनाया हमने ।
यह पाक करके दिलको, मंदीर बनाया हमनें ।।टेक।।
ईश्वर वही हमारा, घटघटमें रम रहा हैं ।
सेवा सभीकी करना, पूजा यह बनाया हमने ।।१।।
जलता है ग्यान-दीपक, हरदमपे दम लगाकर ।
बजती है तार अनहद, घंटा यह चढाया हमने ।।२।।
नीती और न्याय दोनों, यह पोथियाँ हमारी ।
आशिक जो हैं उसीके, पंडीत बनाया हमने ।।३।।
बहती है नीरनदियाँ, शांती-दया-क्षमा जो ।
धो करके षड़रिपूको, रक्षक हि बनाया हमने ।।४।।
दुर्जन वही हमारे, जो भूलमें गिराते ।
सारे हि जमानेकी, एक माल बनाया हमने ।।५।।
प्यारे हैं हम उसीके, जिसने यह भूल छोडी ।
तुकड्या कहे उसीको, गले हार बनाया हमने ।।६।।