श्याम ! किसके भरोसे तू आया यहाँ ?

(तर्ज : आज मेरि लाज प्रभू ! ... )
श्याम ! किसके भरोसे तू आया यहाँ ? ।
किसने लाया तुझे छोड तू था जहाँ ? ।।टेक।।
तेरा निर्गुण है बासा, न रँग रूप है ।
नाम ना धाम ना, तेरा गुण चूप है ।
किसने खींचा है तुझको, कहाँके कहाँ ?।।१।।
सुनते हैं क्षीरसागरमें तू था कहीं ।
साथ लक्ष्मी थी तेरे कदममें वहीं ।
और था शेष जिसका फना  था    महा ।।२।।
कोइ तो कहतें है तू समा हरजगा ।
फिर पता तेरा किसको अघाड़ी लगा ? ।
प्यारे ! करके दया हमको  दे   दे   रहा ।।३।।
क्या न था तुझको बैकुंठमेंसे मिला ? ।
करके आया तू दौरा बना बावला ? ।
कहता तुकड्या समझमें न आता कहा ।।४।।