श्यामकी मोहनी नैन नैना बसी
(तर्ज : खिदमते मुल्कमें गरजे... )
श्यामकी मोहनी नैन नैना बसी ।
ना समावे भरी मोरे दिलमें खुशी ।।टेक।।
सिरपे है मोरके पंखियनकी छडी ।
कान कुंडल है, अँखियनकी भौंहे चढी ।
भरजरीके दुशालेसे कंबर कसी ।।१।।
गालपे लालकी जैसि लाली चढी ।
कंठमें कंठियोंसी है माला पड़ी ।
ना छुटे पलभि करमेंसे, बंसी घुसी ।।२।।
अब तो जी चाहता है न भूलें तुम्हें ।
हम जिधर जाय गायेंगे खूले तुम्हें ।
कहता तुकड्या, छबी मोरे जीमें बसी ।।३।।