शिव-गौरीके बाल, तुम्हारे चंदन
(तर्ज : सरपे टोपी लाल हाथ में... . )
शिव-गौरीके बाल, तुम्हारे चंदन शोभे भाल,
धरें हम ध्यान तेरा ।
बेल-पत्री की माल, शीशपर रत्नमुकूट विशाल ।
धरें हम ध्यान तेरा ।।टेका।।
रिध्दि-सिध्दिका दाता, कला-बुध्दिका विधाता,
भक्तों को सदाही भाँता ।
हाथ त्रिशूल का बान,सुनावे जब डमरु की तान,
धरें हम ध्यान तेरा 0।।१।।
नाम तेरा लम्बोदर है, सूँड तेरि अति सुन्दर है,
पास फलोंकी बहर है ।
चूहोंपर हो सवार, भक्त का करता बेडापार,
धरे हम ध्यान तेरा 0।।२।।
माता शारदा है संगभमें, बीना बजती हैं रंगमें,
शांति सदा आती मनमें ।
जपते तेरा नाम, पूरण करता उनके काम,
धरें हम ध्यान तेरा0।।३।।
अर्ज है हमारी तुमको, उन्नती दे भारत भू-को,
अन्न-वस्र धन दे सबको ।
कहता तुकड्यादास, हमेशा रखते तेरी आस,
धरें हम ध्यान तेरा0।।४।।