शेर हो तो चलो राहभी शेरकी
(तर्ज : खिदमते मुल्कमें गरजे... )
शेर हो तो चलो राहभी शेरकी ।
कहते हो शेर तो रीत क्यों भेड़की ?।।टेक।।
लड़ते हो तो लड़ो कामसे क्रोधसे ।
और काबूमें लाओ सताकर उसे ।
काटो बंधन यह विषयोंके जंजीरकी ।।१।।
करके संसार ना होओ संसारके ।
जानको ना गमाओ बिना यारके ।
फिर गमाओगे जो के जरा देर की ।।२।।
मायामें जो फँसे, शेर होते नही ।
उनके पीछे बला है कहीं ना कहीं ।
कहता तुकड्या प्रभू भक्तपे खैर की ।।३।।