संतनकी महिमा न्यारी है

(तर्ज : यह प्रेम सदा भरपूर रहे...)
संतनकी महिमा न्यारी है, बलिहारी है ! बलिहारी हैं ! ।
यह बेद-पुराण उचारी है, बलिहारी  है ! बलिहारी हैं ! ।।टेक।।
प्रभुमें उनमें नहि भेद जरा, बलके प्रभुसे बलकारी है ।
प्रभुसे ना कर्मकि रेख मिटे, सो संतोंने खुद टारी है ।।१।।
कई पंगूओंको पैर दिये, कइ गूँगोंको है दी वाणी ।
संतोकी अडभँग वाणीभी, प्रभुने पूरी कर डारी है ।।२।।
थे संत गजानन अवलीया, मशहूर थे सारे लोगोंमें ।
शेगाँवमें उनका ठाना है, उनकी परतीती प्यारी हैं ।।३।।
अधिकार उन्हींका कौन कहे ? जो सिध्द बने जीवभावोंसे ।
तुकड्याकी ग्वाही है दिलसे, वे दिननके हितकारी हैं ।।४।।