शारदा माई सुमरो गणेशा

(तर्ज: सुमरो गणेशा.. )
      शारदा माई सुमरो गणेशा ।।टेक।।
विघ्नहरण तेरो सदा भजन । जो गावे सुखको पाई ॥
सदा चरणमें ध्यान  धरे जो । इहपर - लोक  माँही -
       कभू दुःख नाही ।। सुमरो 0।।1।।
सत्‌ व्यवहार ही पूजा तेरी । सच्चा ग्यान है माला ॥
जन-सेवा है चंदन-चावल । त्याग धूप-दीप तुझको -
      प्रेमका  उजाला ।। सुमरो 0।।2॥
भांग धतूरा-शराब-गांजा । जरा तुझे नहिं भावे।।
भाता तुझको. जिसने बोला। उसीके गलेमें -
     काला साँप चढ जावे ।। सुमरो 0।।3।।
तू है सब देवों का नायक। गणपति नाम धराई ।।
भक्ति-मुक्ति भण्डार है तेरा। विषयभोग तज जो जावे -
          जनम फिर नाही ।। सुमरो 0।।4।।
एक बार असुरोंने पूजा । उलटी मार पराई ॥
एक बार भगतोंने पूजा । भारतकी भूमाताको -
          बंधसे    छुड़ाई ।। सुमरो 0।।5।।
हम सुमरण करते है तेरा । कर भारत सुखदायी।।
तुकड्यादास शरण है तेरे । अन्न-वख्र-विद्या दे दे-
          शांतिको सहाई ।। सुमरो 0।।6।।