विकारसे मत देख किसीको

(तर्ज: उंबरठ्यावर माप ठेवले....)
विकारसे मत देख    किसीको ।
नीच समझ मत फेक किसीको ।
सभी है अपने गडी,
समझले  बात  अनोखी  बडी ।।टेक।।
जन्म न किसको करता पापी ।
पापी     है   करनीसे   आपी ।।
भुले न  इसको   गडी।। समझे 0।।१।।
मोक्ष   नहीं   मरनेपर    पावे ।
वह तो जीते - जी दिख जावे ।।
जिससे सेवा   घडी।। समझले 0।।२।।
ग्यान   नहीं   होता   पढनेसे ।
वह मिलता अनुभव घडने से ।।
जिसपे आफत पड़ी।। समझले 0।।३।।
तुकड्यादास कहे, सुन भाई ।
मत गा किसीकी कभी बुराई ।।
जरा  न  पावे    छडी।। समझे 0 ।।४।।