शियार हो भारतवालो !

           (तर्ज:हवालदिल हो गया जमाना...)
होशियार हो भारतवालों ! अब आलसका काम नहीं । 
जागों तो फिर अमर रहो,नहिं तो खोजाओ जान कहीं ।।टेक।।
मनमुराद गालियाँ बको और सेवा कुछ हासिल न करो
नेतागिरीका बाना कर, कालेबजारसे   जेब   भरो ।।
दण्डेली कर वोट कमाओ, अपनी बडाई आप करो ।
लाखो रुपये लूट करो,और चुनावमें पद प्राप्त करो ।।
वाहवारे ! यह देशभक्तिकी शान जमाना सीख गई ।
क्या होगा दुनियाका भला जब अगुआ नीतीमान नहीं ? ।।१।।
ऐसा काम करो मत यारो ! बिगड़ा भारत है सारा ।
धोखा खा जाओगे एक दिन,गौर करो मानो मेरा ।।
जो कोई अच्छी राहसे चलते,उनको सत्ता सौंप चलो ।
उन्हीसें अपना भला रहेगा, कभी न ऊंची राह भुलो ।।
मत देखो जातपाँत अपनी, पंथ - धर्म   सेवामें   नहीं ।
इमानदारी सबकी बराबर, यहाँ भेदका काम नहीं ।।२॥
जिनकी आदत सेवाही है, उनके आगे वोट   धरो । 
अपना जीवन सार्थ करो और देशका भी कल्याण करो।।
मैं नहीं हूँ किसी पंथ-पक्षका, धर्मवर्म मेरा है वही ।
सत्य नाम लो,सत्य काम लो,सत्य मार्ग लो,मोक्ष वहीं ।।
सेवाभावना सबमें व्यापो, गुणी-जनोंका मान करो ।
जीवनका साहित्य बढ़ाकर, तनमनसे वहिं ध्यान करों ।।
तुकड्यादास कहे ऐ मित्रो ! सुधरो, फिर अवसरही नहीं ।
जागो भारतवासीयों ! फिर, भूलके धोखा हो न कहीं ।। ३।।