गो - पाल भारत के

       (तर्ज : सबके लिए खुला है मंदिर. )
गो-पाल भारत के । गो - काल हो   रहे   है । 
डरकर विधर्मियोंको । घर-घर मे सो रहे है ।।टेक।।
हिन्दु धरमकी नाती । गैय्या को मानते थे ।
अब हाल क्या हुआ है । सब चाल खो रहे है ।।1।।
श्रीकृष्ण कह चुके है । गीतादि ग्रंथओं मे ।
गैय्या है प्राण मेरा । यह   बात   खो   रहे   है ।।2।।
भूलो न हिन्दू लोगों । सेवा करो गौ की । 
भुल जा रहे उसीको । करकेही रो  रहे  है ।।3॥
तुकड्या कहे ये गैय्या । माँ है भारतियोंकी ।
जामीन है हिन्दुओंसे । जो आज जी रहे है ।।4।।