चल देख पुजारी बाहर,कुछ प्रेम कि आँख लगाकर
(तर्ज : मुझे छोड गये बालम... )
चल देख पुजारी बाहर,कुछ प्रेम कि आँख लगाकर ।
ठाकुरजी कहाँ है तेरे, खेतीमें है या मन्दर ।। टेक ॥
कई रोजसे पूजा करता, प्रभु बात किया था उससे ?
क्यों सोया देव जगाता, ले पूंछ जरा तो फिरसे । ।
बह सत्य चुकाकर लाये,मेफिल की नजरों भीतर ।।१।।
दर-दर वो घुमता है, हर काम दर्ज करता है ।
दुख देखेपर रोता है, सुखियों को बतलाता है।।
कहे तुकड्या निर्भय बोले,अरे रहम करो सबही पर ।। २।।