घर चलो, घर चलो
(तर्ज: दिलवाले ! ऐ दिलवाले...)
घर चलो, घर चलो ।
ना इनसे मिलो, ना उनसे; हो घर... ।।टेक।।
एक तरफ तो मान मिले ।
एक तरफ शैतान मिले ।।
चलो दोनों को भी काट ।
चढो प्रेम -नदि - घाट ।।
प्रभु-भक्ति में अपना समझको ; हो घर...।।1।।
एक तरफ तो जाति मिले ।
एक तरफ संप्रदाय मिले ।।
दोनो अडंगेकि बात ।
सीधे बढी एकसाथ ।।
अपनी मानवता दिलसे ले मिलो ;हो घर. .।।2।।
एक तरफको हिन्दु कहे ।
एक तरफ इस्लाम कहे ।।
कोई इंसाई बनाय ।
कोई बुध्द बना जाय ।।
तुम सत् - मारगसे ही धुलो ; ही घर... ।।3।।
कोई कहे तुम योग करो ।
कोई कहे तुम भोग करो ।।
तुम कर्म सीख लो !
सच्चे वर्म सीख लो ! !
कहता तुकड्या सभीका प्रेम लो ;हो घर..।।4।।