सच्चा सेवक वही कहलाता

          (तर्ज : आवो सुन्दर देश बनाये...)
सच्चा सेवक वही कहलाता, जिसमें अमृत ग्यान सुहाता ।।टेक।।
पर-स्त्रीको माता-सम देखे, परधन माटी समझता।
रुखा-सूखा जो मिल जाये, खाकर काल निभाता ।।1।।
सादा जीवन उत्तम भाषण, देकर जन सुखवाता।
मान-प्रतिष्ठा -गर्व न चाहे,निन्दा-स्तुति नहीं भाँता।।2।।
तत्पर है सेवा करनेको, धीर-वीर गुण गाता ।
तुकड्यादास कहे - भक्तीमें, नैयन   नीर  बहाता ।।3।।