वो दिन देखी सूरत मोरी
(तर्ज: मेरी नैना में रामरूप छाय गयी रे... )
वो दिन देखी सूरत मोरी आँखमें सुहावनी ।
आँखमें सुहावनी, गुरुदेव भक्ति पावनी ।।टेक।।
जबसे दिया ग्यान मुझे ।
बाकी था अनुमान मुझे ।।
ध्यान लगा आसनपे, तबसे बात ले गनी ।।१।।
अँखियनमें तार चढा ।
रंग - रंग खूब बढा ।।
फिर न पूछो प्रेम गडा, मस्त नशा आ बनी ।।२।।
सोहम की बीन बजी ।
आपही चल रही अर्जी ।
तुकड्याके भेद मिटे,मैं-तू भेद कौन गनी ?।।३।।