ग्यानकी सप्त-भुमि का
(तर्ज : सारी टुनियाँ का... )
ग्यानकी सप्त-भुमि का अधिकार है ।
ऐसे गुरुदेव से ही नमस्कार है ।।टेक।।
जिनकी चारों अवस्थापे आसन जगा।
सप्त-चक्रोंकी माला का चन्दन लगा।।
उन्मनी का खुला है सदा द्वार है ।।1।।
जिनकी बाणी में बन्सी की बोली चले।
कामी -छलियोंके दरसन से दिलही मले।।
लगता हम भी तजे सारा घरबार हैं ।।2।।
हर समयपर बदलनेका ढंग है उन्हें।
हर मरीजों को मिलनेका रंग है उन्हें ।।
वो अनासक्ति योगों का करतार है ।।3।।
जिसमें कर्तम-अकर्तुम् है शक्ति भरी।
अन्यथा भी है कर्तूम की मस्ती पूरी ।।
कहता तुकड्या वो नर-जन्म का सार है ।।4।।