सत्‌गुरु नाम तुम्हारा, दिलसे पियारा। जो जपता है जनम सुधारा

(तर्ज: सासरला मुलगी निघाली.... )

सत्‌गुरु नाम तुम्हारा, दिलसे पियारा।
जो जपता है जनम सुधारा ।।टेक।।
पापीसे भी पापी हो कोई,जिसको जगा तिहूँ लोकमें नाही ।
गुरु-चरणोंसे प्रेम लगाई,देवत मंत्र अपारा,होत उजारा।
जो जपता है, जनम सुधारा 0।।१।।
पारसमणि लोहा सुधरावे, कनक बनाकर कीमत लावे।
लेकिन सत्‌गुरु किरपा पावे, आप समान उजारा,देकर तारा।
जो जपता है, जनम सुधारा 0।।२।।
सब देवनका देव गुरु है, सब साधनका साध्य गुरु है।
सब विद्याका ग्यान गुरु है, ऐसा वेद पुकारा, शास्त्र अधारा।
जो जपता है, जनम सुधारा 0।।३।।
ऐसा नाम जपे नहिं प्राणी, करता हैं जीवन की हानी।
तुकड्यादास ने गायी कहानी, अनुभव ले सौ बारा,बचन हमारा।
जो जपता है, जनम सुधारा 0।।४।।