गीता संप्रदाय नहीं किसका

         ( तर्ज : साधो ! सन्त मिले बडे भागा...)
गीता संप्रदाय नहीं किसका,जस गाते सब उसका।।टेक।।
तत्त्वभरा सब समझबूझने ,अध्यात्मिक गुण-रसका ।
गीता संप्रदाय नहीं  किसका 0।।1।।
योग-याग -भक्ति और मुक्ति सब साधन है जसका |
गीता संप्रदाय नहीं किसका 0 ।।2।।
भक्तिवान्‌ संकटमें आवे मार्ग मिलेगा बसका।
गीता संप्रदाय नहीं किसका 0 ।।3।।
कर्म करो आसक्त न होना, यही धर्म अचरजका ।
गीता संप्रदाय नहीं किसका 0 ।।4।।
जाती -नाती प्रीत मोहकी, गन्दा हे जल पसका ।
गीता संप्रदाय नहीं किसका 0 ।।5।।
नाना पंथ -मतान्तर लेते, अर्थ खींचकर खुदका ।
गीता संप्रदाय नहीं किसका 0 ।।6।।
तुकड्यादास कहे दैवी गुण हो मानव के नसका ।
गीता संप्रदाय नहीं किसका 0 ।।7।।