विश्व हिदु परिषद में सारे

             (तर्ज: सच्चे सेवक बनेंगे. . . )
विश्व हिंदु परिषद में, सारे    हिंदूओंका   मान   करे ।
आओ सब मिल साथ करें और भारतका कल्याण करें ।।टेक।।
हमने समझा था कि दुनिया   मानवताकों   गाती   है ।
पर अनुभवसे देखा हमने, अपना   धर्म   बढाती   है ।।
तब तो हिंदू क्यों सोयेगा? जिसका धर्म   पुराना   है !
तत्वनिष्ट और सहजीवनका जिसका सच्चा बाना है !!
हम हिंदूकी शान बढायें, विश्व भरें ऐलान करें ।
                  आओ सब मिल 0।।१।।
अपने अपने. गुणकर्मोसे हम  क्षत्रिय   रणवीर   बने ।
वैश्य बने और शुद्र बने, ब्राह्मण भी तो गुणसेहि बने ।। यों तो   हममें भेद नहीं है, धर्म - वर्म   कहलाने   को ।
भारत में उत्पन्न हुए तो सभी   धर्म    अपनाने   को ।।
सदाचार, चारित्र्य, सत्य का,बच्चा बच्चा ध्यान करें ।
                       आओ सब मिल।।२।। 
जो कोई नीति-न्यायसे चलता तब तो उससे प्यार करो 
अन्यायी और दगाबाजकों ठार  करो   उध्दार   करो ।।
राम - कृष्ण का यहि बाना है, हमभी वहि निर्धार करें ।
छत्रपती शिव महाराणा के जैसा सत्  ‌ परिवार   करे ।।
वही गाती रामायण गीता, घरघरमें   वह दा न   करें !
                      आओ सब मिल 0।।३।।
हममें भी कुछ  कुडाकचरा   आया   उसे  हटायेंगे ।
किसी धर्मकी निंदाको भी जरा न हम कर  पायेंगे ।।
अपना बल, शिक्षा और दीक्षा, घरघरमें फेलायेंगे ।
खेती -किसानी करके अपना जीवन खुदहि बनायेंगे ।।
अमन -चमनसे,भाव-भक्ति से सबके अंदर जान भेरें ।
                      आओ सब मिल 0।।४।।
चाँद-सूरज ये जबतक जीये वीरोंका इतिहास यहाँ ।
ऋषियोंकी शक्ति -कुर्ति फैली,संशोधक होगये जहाँ ।।
अवतारोंकी ध्वजा ग्रंथ है, मंथन करके ज्ञान दिया ।
देशधर्मके कारण जिसने समय पडा तो युध्द किया।।
बोले तुकड्यादास चमक कर विज्ञानहि पर तान करें ।
                      आओ सब पिल 0।।५।।