सदा सुख में रहूँगा मै

           (तर्ज: अगर है ग्यानकों पाना... )
सदा सुख में रहूँगा मै, अगर मुझको बता दोगे ।।टेक।।
कहाँपर ठौर कुंजनका? त्रिवेणीका कहाँ संगम ?
सब्र-जलसे नहूँगा मै, अगर  मुझको  बता  दोगे ।।१।।
मधुर वह धार अमृत्त की,कमल की मोहनी माला ।
मिले तो ना दहूँगा मै, अगर  मुझको  बता  दोगे ।।२।।
कहाँ निजधाम का मारग,न आऊँ लौटकर जिससे ?
उसी पथको गहूँगा मैं, अगर मुझको  बता  दोगे ।।३।।
अटल जो आपकी मस्ती, मिले कैसे खुदी  खुदमें ?
विषय फिर ना चहूँगा मै,अगर मुझको बता दोगे ।।४।।
सुदामा वह कहे गुरुजी ! समा दो मौज में सत्‌की ।
हजारोंसे  कहूँगा  मैं, अगर   मुझको  बता  दोगे ।।५।।