गांधी ! काँटों से तुमने निकाला था फूल

     (तर्ज: श्यामसुंदर की मीठी लगी...)
गांधी ! काँटों से तुमने निकाला  था  फूल ।
बलके   काँटे  नही  थे, वे   थे  तेज  शूल ।।टेक।।
कौन कहता था, हमको मिलेगा स्वराज ?
कितनी थी हमंमें ताकत या लडनेका साज ?
था न शिक्षण,न एकी, सभी  में  थी  भूल ।।१।।
हम तो पायेंगे आजादी अपनी  जगे ।
लोग सुनकर ये बातें तो हँसने  लगे ।
सारे कहते थे तकलीसे क्या हो  बसूल ? ।।२।।
नमक - सत्याग्रहादि को बदनाम कर ।
कहते, कैसी अहिंसा जितेगी   समर ?
तेरी निष्ठाने उनको   खिलायी   है   धूल ।।३।।
राज्य लेना, चलाना, क्या आसान था ?
ब्रिटिशोंका    जमानाही    तूफान    था ।
कहता तुकड्या गुलामी  हटा  दी  समूल ।।४।।