गांधी ! तुने थी भारतकी शान बनायी
(तर्ज: आओ सभी मिल जायके... )
गांधी ! तुने थी भारतकी शान बनायी ।
तेरे चले जानेसे फिर न किसने निभायी ।।टेक।।
जनतामें जोश आया बलिदान कराने ।
भारतको गुलामीसे आजाद बनाने ।।
थी बाज से चिड़िया की क्या खूब लडाई ।।१।।
घर-घर के जवानोंने सीना था बढाया ।
लाठी चले या गोली, झण्डाही चढाया ।।
साप्राज्य को हिला दिया,यह वक्त थी आयी ।।२।।
काफी वकील, डाक्टर, कविराज, पुराणी ।
मौलाना, मण्डलेश्वर, कालेज के ग्यानी ।।
भागे थे तेरे पीछे, करामात दिखायी ।।३।।
एक घास की कुटी में आसन था जमाया ।
ले हाथ अपने चरखा, कम्बल था बिछाया ।।
शान्ति की माल जपते जिंदगी थी बसायी ।।४।।
थी राम - रहीमा की वह प्रार्थना तेरी ।
आदर्श था ऋषीका, थी मस्त फकीरी ।।
तुकड्या कहे वह संस्कृति की ज्योति जगायी।।५।।