गुजरान करो गरीबीमें, कुछ मौज नहीं अमिरी में

            (तर्ज : गुरुदेव हमारा प्यारा... )
गुजरान करो गरीबीमें, कुछ मौज नहीं अमिरी में।।टेक।।
धन-धन कर पैसा ले आवे, नाहक पीछे चोर लगावे ।
रहता नहीं पास किसीमें ।। कुछ मौज 0।।1।।
जेसा - जैसा धन बढ जावे, वैसी बुद्धी पाप करावे।
फिर दुख होता है   जी में।। कुछ मौज0 ।।2।।
कभी तो लगती, आग है धनको , रोका नहीं जाता फिर मनको।
घन बहता, झगड, छुरी में।। कुछ मौज0।।3।।
सात्विक रहना, सात्विक खाना, प्रभु सुमरणमें वख्त निभाना।
है तारन सुख  भी   इसीमें।। कुछ मौज0 ।।4।।
मजदूरी नेकीसे करते, उनके घर प्रभु भी जस भरते।
कहे तुकड्या रहे सबुरीमें।। कुछ मौज0।।5।।