गांधी का हमेशाही बस एक था भजन

        (तर्ज: जाओ उन्हींकी शरणमें.. )
गांधी का हमेशाही बस एक था भजन ।
आजाद करो मुल्क,नीति साधलो सजन ! ।।टेक।।
बस रामनाममें भी यहही पुकार थी ।
चाहे किसीने गाली  दी   तोभी   हार   थी ।।१।।
चरखे की गूँजमें भी, बस एक था भजन ।
अपमान कष्ट सहना, फिरभी खुशी रहा ।।२।।
सैनिक बनो शान्तीके घर-घरमें यह कहा ।
सोते औ चलते -फिरते,बस एक था भजन।।३।।
सब धर्म-जाति-पंथ को नजदीक बुलाया ।
हम एक है, एकीपमें  रहेंगे   यह   सुनाया ।।४।।
भंगी की मुक्तिमें भी, बस एक था भजन ।
अस्पृश्यता   हटाओ   नारा   चला   दिया ।।५।।
महारोगको मिटाओ सबको बता दिया ।
तुकड्याने सुना देखा,बस एक था  भजन ।।६।।