ग्यान - भक्ति से देखूँ तो रुप तेरा है

     (तर्ज : वो तो बिन जापतापे.... ) 
ग्यान-भक्ति से देखूँ तो  रुप  तेरा  है ।
कोई बाहर से देखे, तमासा  भरा   है ।।टेक।।
माया के घूँघटसे, नाम ही छुपा दिया ।
जिसने जो काम किया, उसीको बता दिया ।
होगया जो अच्छा-बुरा उसीको घूला दिया ।
अपना -अपना खेल,खिलाडियोंसे चला दिया ।
अन्दर मौज देखूँ , सुख तेरा है । कोई बाहर से 0।।1।।
काम - क्रोध - लोभ -दंभ, इनका भी गुट है ।
मनको भटकाता है - दिखाता झूठमूठ है ।
ग्यान और बैराग सारे, देखते है फूट है ।
समय जायगा तो फेर आवेंगे  पलट  है ।
तुकड्यादास कहे, प्रभुका ही घेरा है । कोई बाहर से 0।।2।।