चल-चल जवान सब छोड शान !

(तर्ज: तुझी प्रीत उघड करू कैसी, सांग...)
चल-चल जवान सब छोड शान !
यह कौन द्वार आया तुफान ? ?
करने को सब नष्ट मान !    ।।टेक ।।
तू अपना नहीं देश पछाने।
तब कैसी जीयेगी    जान ?  ।।1।।
जिन बीरोंने खून दिया था।
उसका कुछ रखले   गुमान ! ।।2।।
आजादी यह भूषण  तेरा ।
गुम जाये पशू-तुल्य    प्राण ! ।।3।।
आँख उठाकर देख जरा तो।
सरपर नाच   रहा   विज्ञान ! ।।4।।
तुकड्यादास वीर बन बोले- 
हम भारत माँ की    संतान !  ।।5।।