सता रही है वह याद मुझको,जो पूज्य गांधीसे हो गई है
(तर्ज: यहाँ वहाँ कया कहाँ... )
सता रही है वह याद मुझको, जो पूज्य गांधीसे हो गयी है ।
तडप रहा रहा है जिगर मगर- होनहार होनेकी होगयी है ।।टेक।।
वह राज्यक्रान्तीकी धार थी जो, कदममें ऊधम मचा रही है ।
गया महात्मा अमर हुआ पर, जगत्की इजतही जा रही है ।।
अजब थी रोशन आवाज उनकी, न बम् न बन्दुक बढे कहीं है ।
मिलायी सत्ता, स्वराज्य पाया, दया-अहिंसाहि तो सही हैं ।।
अजब था बापू ! दिमाग तेरा, महल मिला पर रहा नहीं है ।
निवास तेरा था भंगियोंमे, यही स्थितप्रज्ञता सही है ।। १।।
न मुस्लिमोसे था बैर तेरा,न ख़िश्चनोसे भी द्वेष देखा ।
न हिन्दुओंकी रुढीपर आशक, सभीमें समता हितेश देखा ।।
बिमार हो या हो कोई तगडा,अमीर हो या गरीब देखा।
रहे वह बम्मन या कोई हरिजन, हुशार है तो करीब देखा ।।
तू था भिखारी, सदाका तुझपर, न भरके खादीका वस्र देखा ।
चलायी भारतकी सल्तनत पर, न पास थोडाभी शस्र देखा ।।
हटाया रूढीको तूने सबही, शहीदमें तू कमी नहीं हैं ।
तडप रहा है जिगर मगर, होनहार होनेकी हो गयी हैं ।।२।।
है इस नये युगका तू विधाता, न किसने पाया दिमाग तेरा ।
बडे मुत्सद्दी ब्रिटीश थे पर,उठाया तूनेही उनका डेरा ।
साहित्यमें तू,कलामें तू ही,था गद्य कविता-बहार तेरा।
कदरमें तू, बेकदरमें तूही, सत्-न्यायमय था दिदार तेरा ।।
सभी जगत्के नरेश नेता-भी मानते थे विचार तेरा ।
खुदीकी करनीसे तू महात्मा हुआ वाहवा ! सुधार तेरा।
थी किसने तुझपर चलाई गोली? वे सैंकडो थे, न एकही है ।
तडप रहा है जिगर मगर-होनहार होनेकी होगयी है ।।३।।
ऐबापू ! तूने तो देशभर जो, किया हुनर, हम भुले नहीं है ।
तेरा बगीचाहि है भरा सब, जो ना कहे वह तो शत्रूही है ।।
तेरे नियमका रहा जो पाबंद, उसीसे दुनिया यह झुक रही है ।
तेरी नजर जिसपे है कडी वह-चढी चढीपरहि सुख रही है ।।
है बालकोंमे तू प्रिय सबको, सभी बहन-भाइको सही है ।
है कौन ऐसा इस देशभरमें ? जिसको कि तुझसे अदब नहीं है ।।
वह दास तुकड्या की आस यों है,करूँगा सेवा जो कुछ रही है ।
तडप रहा है जिगर मगर-होनहार होनेकी हो गयी है ।।४।।