गावोना रिझावो भगवन् !

           (तर्ज: जावो, ना सताओ रसिया....)
दोहा -1 : प्रीत गयी, नेकी गयी, सारा गया इमान।
अब तो मिलावट,घूँस है, झूठोंका थैमान।।

दोहा-2 : हाँजी-हाँजी रह गयी, करो न चाहे काम।
ऐसे भारत-भूम की तुम पत राखो राम ।।

भजन    : गावोना, रिझावो भगवान्‌ !
लेकिन न छोडो, दिलसे ईमान ! ।।टेक।।
भले चाहे न पूजा हो, मगर सत्‌का तकाजा हो ।
दिलमें हो प्रीति सबकी समान।। गावोना0 ।।1।।
गले चाहे न माला हो, मगर संयमको पाला हो ।
दु:ख हो न किसको,बस हो,ये ग्यान।। गावोना0।।2।।
बदनपर हो न हो चन्दन ,मगर हो मन करूण -क्रन्दन ।
नहीं हो सिफारस, जो मुझमें गुमान ।। गाबोना0 ।।3।।
भले चाहे न हो साथी, मगर हो दिल मेरा हाथी ।
कहे तुकड्या, सुनो मेरा ज्ञान! ।। गावोना0 ।।4।।