भजन

क्रमांक भजन
1 गर्जे तिन्ही लोकी नाद ।
2 गर्व क्या धरता तनूका ? जान क्षणकी छाय है
3 गर्व नका धरू कोणी I
4 गर्व मत कर देहका, यह स्वप्न सम जग-बाग है
5 गर्व होऊ नये आपूलिया लोकां ।
6 गले तुलसी की माल है । भूल न जाऊँ; इन बातों को
7 गलेमें क्यो पहनी माला ?
8 गळा तुळसीची माळ
9 गळा भुजंगाचे हार I
10 गळ्याचाहि गळा जीवाचा जिव्हाळा
11 गवळणी किती वेळा गासी ?
12 गवसला कृष्ण जया हाता तया मग
13 गहन कर्माचा विचार I
14 गांजलियावरी काय तू गांजसी ? ।
15 गांधी ! काँटों से तुमने निकाला था फूल
16 गांधी ! तुने थी भारतकी शान बनायी
17 गांधी ! तेरी सही अहिंसा
18 गांधी ! तेरे नामका किसने नही फल पा लिया ?
19 गांधी - गांधी कहनेवालो !
20 गांधी उठे प्रातःसमय, प्रातःस्मरण करतेहि थे
21 गांधी का था मन्दर सुन्दर । बड-पीपल की छाँवमें
22 गांधी का यह मंत्र था
23 गांधी का लगाया पौधा, जाता गर ऊँचा सीधा
24 गांधी का वह जीवप्राण
25 गांधी का हमेशाही बस एक था भजन